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शनिवार, 28 नवंबर 2015

सर्दियों में बादाम से ज्यादा असरदार है चना, रोज खाएंगे तो होंगे ये ढेरों फायदे..

सर्दियों में बादाम से ज्यादा असरदार है चना, रोज खाएंगे तो होंगे ये ढेरों फायदे..
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सर्दियों में रोजाना 50 ग्राम चना खाना शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है।
सचिन कुमार's photo.आयुर्वेद मे माना गया है कि चना और चने की दाल दोनों के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। चना खाने से अनेक रोगों की चिकित्सा हो जाती है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। चने का गरीबों का बादाम कहा जाता है, क्योंकि ये सस्ता होता है लेकिन इसी सस्ती चीज में बड़ी से बड़ी बीमारियों की लड़ने की क्षमता है। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है। मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें। अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है। गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं। चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
सर्दियों में चने के आटे का हलवा कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। यह हलवा वात से होने वाले रोगों में व अस्थमा में फायदेमंद होता है।
रात को चने की दाल भिगों दें सुबह पीसकर चीनी व पानी मिलाकर पीएं। इससे मानसिक तनाव व उन्माद की स्थिति में राहत मिलती है। 50 ग्राम चने उबालकर मसल लें। यह जल गर्म-गर्म लगभग एक महीने तक सेवन करने से जलोदर रोग दूर हो जाता है।
चने के आटे की की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं। भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है। यदि समान मात्रा में जौ चने की रोटी भी दोनों समय खाई जाए तो जल्दी फायदा होगा।
चने को पानी में भिगो दें उसके बाद चना निकालकर पानी को पी जाएं। शहद मिलाकर पीने से किन्हीं भी कारणों से उत्पन्न नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
हिचकी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से शीत के कारण आने वाली हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
पीलिया में चने की दाल लगभग 100 ग्राम को दो गिलास जल में भिगोकर उसके बाद दाल पानी में से निकलाकर 100 ग्राम गुड़ मिलाकर 4-5 दिन तक खाएं राहत मिलेगी।
देसी काले चने 25-30 ग्राम लेकर उनमें 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिला लें चने को कुछ घंटों के लिए भिगो दें। उसके बाद चने को किसी कपड़े में बांध कर अंकुरित कर लें। सुबह नाश्ते के रूप में इन्हे खूब चबा चबाकर खाएं।
बुखार में ज्यादा पसीना आए तो भूने को पीसकर अजवायन और वच का चूर्ण मिलाकर मालिश करनी चाहिए।
चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।
गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है। बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।

गाय का घी


गाय का घी



गाय का दूध जितना पौष्टिक होता है उससे कई ज्यादा ताकतवर गाय का घी होता है। भारत में गाय को प्राचीन समय से ही पूजा जाता रहा है जिसका अपना धार्मिक महत्व है लेकिन भारतीय नस्ल की हर गाय के घी में कई तरह के गंभीर और खतरनाक रोगों को ठीक करने की क्षमता है। इस बात को मेडिकल सांइस की रिसर्च में भी साबित किया जा चुका है। देसी गाय के घी में मौजूद तत्व सीधे आपकी सेहत पर अच्छे प्रभाव डालते हैं। वैदिकवाटिका आपको गाय के घी से मिलने वाले एैसे फायदों को बता रहा है जिससे आप निरोगी और जंवा बने रह सकते हो।
गाय के घी के फायदे
  • नाक में गाय का घी डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
  • गाय के घी से तलवों की मालिश करने से हाथ और पाव में हो रही जलन खत्म हो जाती है।
  • रोज गाय के घी का सेवन करने से कब्ज और एसिडिटी की परेशानी आपको कभी नहीं होगी।
  • छोटे बच्चों में कफ की समस्या हो रही हो तो गाय के घी से बच्चे की पीठ और छाती में मालिश करें। बच्चों को लाभ मिलेगा।
  • गाय के घी का सेवन करने से इंसान की मानसिक और शारीरिक क्षमता बढ़ती है।
  • शरीर में कमजोरी महसूस हो रही हो तो आप 1 चम्मच गाय का घी और मिश्री को एक गिलास दूध में मिलाकर उसका सेवन करें।
  • गाय का घी कैंसर को पैदा नहीं होने देता है। और यह इस रोग को बढ़ने भी नहीं देता है। स्तन कैंसर और आंत के कैंसर से गाय का घी ही आपको बचा सकता है।
  • माइग्रेन के दर्द से निजात पाने के लि गाय के घी की दो बूंदे नाक में सुबह शाम डालें।
  • गाय का घी वजन कम करता है क्योंकि इसके सेवन से कोलेस्ट्राल नहीं बढ़ता है।
  • आंखों की ज्योति बढ़ाने के लिए 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च, 1 चम्मच बूरा और 1 चम्मच देसी घी को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले उसे चाट कर बाद में गर्म दूध का सेवन करें।
  • वात, पित्त और कफ को संतुलित करने के लिए गाय के घी की कुछ बूंदे दिन में 3 बारी नाक में डालें।
  • देसी गाय का घी को फफोलों पर लगाने से आराम मिलता है।
  • लकवा रोग का उपचार भी गाय के घी के सेवन से संभव है।
  • छिलका रहित पिसा हुआ काला चना, घी और बूरा इन तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें और सुबह खाली पेट एक लड्डू को खूब चबा-चबाकर खाएं और बाद में 1 गिलास गुनगुना दूध आराम से पीएं। एैसा करने से महिलाओं में होने वाला प्रदर रोग ठीक होता है। पुरूषों के लिए भी यह फायदेमंद है इससे शरीर ताकतवर और सुडौल बनता है।
  • नाक में गाय का घी डालने से बाल झड़ना रूक जाते है और नए बाल आने लगते हैं।
  • कान की हर समस्या को दूर करने के लिए नाक में गाय के घी की 2 बूंदे डालें।
  • सांप के काटने पर 100 ग्राम देसी गाय का घी पिलाएं फिर उसे गुनगुना पीनी पिला लें। एैसा करने से दस्त और उल्टी लगती है और सांप का विष धीरे-धीरे कम होने लगता है।
गाय के घी से इंसान कभी बीमार नही पड़ता है। बच्चो और बड़ो दोनों के लिए गाय का दूध और घी दोनों ही फायदेमंद है। ये भी पढे-गोमूत्र से कैसे पाए रोगों से छुटकारा

गोमूत्र से कैसे पाए रोगों से छुटकारा


गोमूत्र से कैसे पाए रोगों से छुटकारा



वौदिक ग्रंथों में गाय की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई है गाय से मिलने वाले फायदे क्या हैं और आप कैसे अपने जीवन को स्वस्थ रख सकते हैं। यह अब वैज्ञानिक तौर पर भी सिद्ध किया जा चुका है की गाय का मूत्र कीटाणुनाशक है जो शरीर में विभ्भिन बीमारियों को दूर करने में सहायक है। गोमूत्र में कार्बोलिक एसिड, यूरिया, फाॅस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम और सोडियम होता है । जब गाय का दूध देने वाला महिना होता है तब उस के मूत्र में लेक्टोजन रहता है, जो ह्दय और मस्तिष्क के विकारों के लिए फायदेमंद होता है। गाय के मूत्र का उपयोग विभिन्न रोगों में कैसे किया जा सकता है आपको बताते हैं

1. दमा, जुकाम, खांसी जैसे विकारों में गोमूत्र का सीधा प्रयोग करने से कफ विकार शमन होता है

2. पेट के किसी भी तरह के रोग में गोमूत्र पीने से लाभा होता है

3. कब्ज़ रोगी को गोमूत्र को 3-4 बार छानकर खूब पीना चाहिए

4. बच्चों को खोखली होने पर गोमूत्र को छानकर उसमें हल्दी मिलाकर बच्चों को पिलाना चाहिए
5. आंखों में जलन, शरीर में सुस्ती में गोमूत्र में चीनी मिलाकर पीना चाहिये


6. दूध पीने के साथ साथ गोमूत्र का सेवन करने से शरीर में सूजन कम होती है


7. प्रसूति के समय होने वाला सुवा रोग में स्त्री को गोमूत्र पिलाने से अच्छा लाभ होता है


8. दाद पर गोमूत्र में धतूरे के पत्तों को पीसकर उबालें और गाढ़ा होने पर लगाने से दाद को दूर किया जा सकता है


9.गोमूत्र को बालों पर लगाकर उसे थोडी देर तका सूखने दें उसके बाद बालों को धोऐं एैसा करने से आपके बाल सुन्दर लगेगें


10. शरीर में ज्यादा खूजली होने पर गाय के मूत्र की मालिश करें
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पुरूषों के लिए सेहत के घरेलू नुस्खे


पुरूषों के लिए सेहत के घरेलू नुस्खे



आज का समाज बहुत ज्यादा बदल चुका है। लोग दिन-रात सिर्फ पैसों की ही वजह से इधर-उधर जाते रहते हैं और इसी वजह से दिन रात एक कर देते हैं मगर वे इस बात को भूल जाते हैं की अगर जान है तो जहान है। यानि अगर हमारी सेहत अच्छी है तो हम मजबूती से हर काम कर सकते हैं। हमारा जो शरीर है वह एक मशीन की तरह है उसे काम के साथ-साथ उर्जा भी चाहिए होती है जो कि ठीक प्रकार के खाना खाने से मिलती है।
खान-पान इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस तरह का खाना खाते हैं। आज का व्यक्ति समोसा, बर्गर और न जाने कितने तरह के फास्ट फूड का सेवन कर रहा है। जबकी ये बात जानते हुए भी कि फास्ट फूड सेहत को सीधे खराब करता है। इस तरह का खाना हमारी पाचन क्रिया को नुक्सान पहुंचाता है और जिसके कारण हमारा शरीर असंतुलित हो जाता है।
अब सवाल यह है कि हम क्या खाएं और किस तरह का भोजन लें जिसके बाद हमारा शरीर संतुलित बना रहे। अब हमारा शरीर संतुलित रहे इसके लिए हमें कुछ इस प्रकार का भोजन करना चाहिए।
सबुह हमें नाश्ते में जूस का गिलास पीना चाहिए क्योंकि नाश्ते में जूस लेने से शरीर को चिकनाहट मिलती है जो की शरीर को पूरी तरह से उर्जावान और शक्तिशाली बनाता है।
सुबह उठकर आंवला खाना चाहिए क्योंकि आंवला एक एैसा फल है जिसे खाने से हमारे शरीर का विकास होता है और आप हर बीमारी जैसे खून की कमी, सुस्ती, त्वचा की परेशानी आदि से दूर रहते हैं। हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है की आंवला खाने से इंसान को डाक्टर की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि यह शरीर को चुस्त रखता है।
हर व्यक्ति को एक दिन में 300 कैलोरी उर्जा चाहिए होती है यदि इससे कम उर्जा मिलती है तो शरीर असंतुलित हो जाता है। कई बार लोगों में गलत धारणा बन जाती है कि अधिक खाना खाएगें तो ज्यादा उर्जा मिलेगी और हमारा शरीर और अच्छा बनेगा। लेकिन एैसा नहीं है क्योंकि हमारे शरीर को जितनी उर्जा की जरूरत होती है वह उतनी ही लेता है और बाकी की जो उर्जा बची होती है उसे वह नष्ट कर देता है।
हमारे भोजन की प्रक्रिया एैसी हो जैसे नाश्ता हैवी, दोपहर का खाना उससे कम और रात को हल्का भोजन करना चाहिए। खाना खाने से ही हर परेशानी का हल नहीं होता है उसे पचाना भी जरूरी होता है। खाना खाने के बाद कुछ लोग या तो बैठ जाते हैं या फिर तुरंत सोने की तैयारी करते हैं लेकिन यह गलत आदत है खाना खाने के बाद हमेशा 200 कदम जरूर चलें तभी खाना ठीक से पचेगा।
दूध का सेवन
रात को साने से पहले एक गिलास दूध का सेवन जरूर करें। क्योंकि सोते वक्त इंसान के शरीर से उर्जा अधिक नष्ट होती है। दूध पीने से हमारी उर्जा बरकरार बनी रहती है। एक रिसर्च में पाया गया है कि जो इंसान इन सारी बातों को अपनाता है वह कभी बीमारी नहीं होता और वह मजबूत शरीर के साथ अपना जीवन बिताता है।

थायराइड के लक्षण और घरेलू उपचार

थायराइड के लक्षण और घरेलू उपचार

थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। ये तितली के आकार की होती है।
थायराइड दो तरह का होता है। हाइपरथायराइडिज्म और हाइपोथायराइड। पुरूषों में आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।
आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं।
पुरूषों में थायराइड के लक्षण ( Thyriod Symptoms for men ) :
  • सामान्यत पुरूषों में थायराइड की समस्या के कुछ लक्षणों में सबसे पहला लक्षण है अचानक से वजन का बढ़ना या फिर अचानक से वजन का कम होना।
  • दूसरा मुख्य लक्षण है जल्दी ही थकान का लगना।
  • तीसरा लक्षण गर्दन में दर्द या सूजन का होना।
  • चौथा लक्षण है भूख न लगना और पसीना अधिक आना आदि।
थायराइड की समस्या को ठीक करने के प्राचीन आयुवेर्दिक उपाय :
अदरक 
अदरक में मौजूद गुण जैसे पोटेशियम, मैग्नीश्यिम आदि थायराइड की समस्या से निजात दिलवाते हैं। अदरक में एंटी-इंफलेमेटरी गुण थायराइड को बढ़ने से रोकता है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।
 दही और दूध का सेवन
थायराइड की समस्या वाले लोगों को दही और दूध का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए। दूध और दही में मौजूद कैल्शियम, मिनरल्स और विटामिन्स थायराइड से ग्रसित पुरूषों को स्वस्थ बनाए रखने का काम करते हैं।
मुलेठी का सेवन 
थायराइड के मरीजों को थकान बड़ी जल्दी लगने लगती है और वे जल्दी ही थक जाते हैं। एैसे में मुलेठी का सेवन करना बेहद फायदेमंद होता है। मुलेठी में मौजूद तत्व थायराइड ग्रंथी को संतुलित बनाते हैं। और थकान को उर्जा में बदल देते हैं। मुलेठी थायराइड में कैंसर को बढ़ने से भी रोकता है।
गेहूं और ज्वार का इस्तेमाल
थायराइड ग्रंथी को बढ़ने से रोकने के लिए आप गेहूं के ज्वार का सेवन कर सकते हो। गेहूं का ज्वार आयुर्वेद में थायराइड की समस्या को दूर करने का बेहतर और सरल प्राकृतिक उपाय है। इसके अलावा यह साइनस, उच्च रक्तचाप और खून की कमी जैसी समस्याओं को रोकने में भी प्रभावी रूप से काम करता है।
साबुत अनाज
जौ, पास्ता और ब्रेड़ आदि साबुत अनाज का सेवन करने से थायराइड की समस्या नहीं होती है क्योंकि साबुत अनाज में फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स आदि भरपूर मात्रा होता  है जो थायराइड को बढ़ने से रोकता है।
 फलों और सब्जियों का सेवन 
थायराइड की परेशानी में जितना हो सके फलों  और सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए। फल और सब्जियों में एंटीआक्सिडेंटस होता है। जो थायराइड को कभी बढ़ने नहीं देता है। सब्जियों में टमाटर, हरि मिर्च आदि का सेवन करें।
आयोडीन का प्रयोग
हाल ही में हुए नए शोध में यह बात सामने आई है कि आयोडिन में मौजूद पोषक तत्व थायराइड ग्रंथी की कार्यप्रणाली को ठीक रखता है।
थायराइड एक गंभीर समस्या है सही समय पर पता चलने से इसका बचाव किया जा सकता है। पुरूषों के पास समय का आभाव कम होता है लेकिन वे थायराइड के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच करवाते रहें और अपने खान पान में ध्यान दें।

आंवला है आयुर्वेदिक गुणों की अचूक औषधी


आंवला है आयुर्वेदिक गुणों की अचूक औषधी





आंवला अपनी अद्भुद प्राकृतिक गुणों की वजह से आयुर्वेद में अपना विशेश स्थान रखता है। वेदों में आंवले को अमृतफल कहा गया है। आंवले में कई तरह के पौष्टिक तत्व होते हैं। यह विटामिन सी का स्त्रोत है। आइये आपको बताते हैं आंवले के एैसे आयुर्वेदिक गुण जो आपके शरीर को स्वस्थ और पौष्टिक बनाएगें।

आंवले के वैदिक गुण:

1. आंवला खाना मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक होता है। यह रक्त में शुगर को नियंत्रित करता है।

2. दमा, सर्दी और जुकाम में आंवले का सेवन फायदा करता है।

3. आंवले के सेवन से बाल जड़ से मजबूत होते हैं।

4. एक पका हुआ ताजा आंवला प्रतिदिन खाने से शरीर रोग मुक्त रहेगा। और यह आपकी भूख बढ़ाने में भी कारगर है।

5. ताजे आंवले के प्रतिदिन सेवन करने से आखों की ज्योती बढ़ती है। और आखें कमजोर नहीं होती।

6. आंवले का मुरब्बा खाने से विटामिन सी की कमी से होने वाली बीमारीयां आपको नहीं होगी, यह खाने में स्वादिष्ट भी होता है।

7. आंवला खाने से दांत मजबूत होने के साथ-साथ चमकदार भी होते हैं।

8. आंवले का प्रयोग पुदीना और धनिया के साथ मिलाकर इसकी चटनी बनाकर सेवन करना चाहिए।

9. भोजन करने के साथ या भोजन के बाद आंवले का सेवन करने से भोजन पचता है। और यह पेट की गैस की समस्या को दूर करता है।

10. आंवला खून को साफ रखता है और मस्तिष्क को तेज बनाता है।

आंवला शरीर को स्वस्थ रखने की अचूक औषधी है, जानकारी के अभाव में लोग आंवले के फायदों के बारे में नहीं जान पाते। यदि आप जीवन में स्वस्थ और जंवा बने रहना चाहते हैं तो आंवले का सेवन प्रतिदिन जरूर करें। 

मौत को सहज बनाती है मेडिटेशन की तिब्बती विधि

मौत को सहज बनाती है मेडिटेशन की तिब्बती विधि


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यह लगभग आठवीं शताब्दी की बात है जब तिब्बत में प्राकृतिक आपदा अपने पूरे जोर पर थी। कोई भी उपाय काम नहीं कर रहा था जबकि बड़ी संख्या में लोग हताहत हो रहे थे। ऐसे में तिब्बती सम्राट ने भारत की ओर बड़ी आशा से देखा तथा विख्यात बौद्ध आचार्य पद्म संभव को सादर निमंत्रण भिजवाया।

आचार्य के लिए धर्मसंकट की स्थिति थी। वे अनिर्णय की अवस्था में थे। पाटलिपुत्र को छोड़ तिब्बत के लिए प्रस्थान करने का अर्थ था जीवनभर के लिए भारतवर्ष से जुदा हो जाना। तिब्बत के राजा ने अपने दूत को दुबारा भेजा ताकि आचार्य को वहां आने के लिए मनाया जा सके। खैर......आचार्य ने कड़े हृदय से नालंदा को अलविदा करने का मन बनाया ताकि तिब्बत की समस्या का निदान कर सकें।

यह समय था भारत में वज्रयान के चरम का। तंत्रयान की ही दूसरी शाखा वज्रयान में तांत्रिक प्रयोगों का बहुत सूक्ष्मता से प्रयोग किया जाता था। आचार्य पद्म संभव ने तिब्बत पहुंचकर तंत्र प्रयोगों की श्रृंखला स्थापित की तथा तिब्बती आपदा का बड़ी मात्रा में निवारण किया। यही वजह रही कि तिब्बत में वज्रयान के विविध प्रकार अपनी जड़ें जमाते गए और धीरे-धीरे राजाश्रय मिलने के कारण बौद्ध धर्म वहां पूरी तरह स्थापित हो गया।

आचार्य पद्म संभव ने एक बड़ा ही अद्भुत प्रयोग किया। उन्होंने मृत्यु को सहज बनाने तथा पुनर्जन्म के चक्रण से मुक्त होने के लिए “बारदो थोडाल” नामक एक मेडिटेशन अथवा ध्यान की पद्धति विकसित की, जिसका उपयोग मृत्यु के द्वार पर खड़े इंसान के साथ किया जाता है।

हैरान करने वाली है मृत्यु को सहज बनाने की ये विधा, जिसमें ऐसे किसी भी व्यक्ति के सामने कुछ लोग एक खास तरह के मंत्र का उच्चारण करते हैं। मूलतः इस मंत्र का उद्देश्य ये होता है कि मृत्यु के द्वार पर मौज़ूद व्यक्ति पूरी तरह जाग्रत अवस्था में हो तथा उसे ये एहसास हो कि वह केवल शरीर को त्यागने जा रहा है। मृत्यु उसके लिए एक उत्सव बने न कि भय का एहसास।    

बारदो के सूत्र व्यक्ति को ये एहसास कराने के लिए हैं कि तुम एक यात्रा पर निकल रहे हो इसलिए बोध या फिर जागरण की अवस्था में रहो। जब भी मृत्यु शय्या पर लेटा हुआ व्यक्ति आंख मूंदने लगता है तो उसके कान में बारदो के सूत्र को दोहराया जाता है। उससे कहा जाता है कि तुम केवल शरीर त्याग रहे हो इसका तुम्हें भान होना चाहिए। तुम दूसरा शरीर धारण करोगे लेकिन वह गलतियां नहीं दोहराओगे जिसे तुमने इस शरीर में रहते हुए किया है। तुम्हें याद रहना चाहिए कि इस चक्र से तभी मुक्ति मिलेगी जबकि तुम अगले जन्मों में इस जन्म में हुई भूलों को नहीं दोहराओगे।

निश्चित रूप ये प्रयोग क्रांतिकारी है। पूरी दुनिया में मृत्यु का ऐसा आयोजन और कहीं नहीं किया जाता है। मृत्यु जब शोक न रहकर मुक्ति बन जाए तो आनंद जन्म लेता है..............मृत्यु जब एक अद्भुत संयोग बन जाए तो मुक्ति मिल जाती है........मृत्यु जब एक इंतजार बन जाए तो उत्सव घटित होता है। कुछ ऐसाअ ही बारदो का प्रयोग, जिसे इसलिए आजमाया जाता है ताकि इंसान पुनः-पुनः उन्हीं गलतियों को न दोहराए जो उसने वर्तमान शरीर में रहते हुए की है।

होशपूर्ण मृत्यु, जाग्रत अवस्था की मृत्यु, बोध की मृत्यु कुछ ऐसी ही अवस्था प्राप्त की जाती है बारदो के सूत्र के द्वारा। इसमें मृत्यु मोक्ष बन जाती है और दुबारा शरीर धारण करने पर व्यक्ति उन मूढ़ताओं को करने से बच जाता है, जो उसने पिछले जन्म में की थी। 

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